नाशिक महानगरपालिका (NMC) ने महाराष्ट्र का पहला ESCO (एनर्जी सेविंग कंपनी) प्रोजेक्ट शेयर्ड-सेविंग्स आधार पर लागू किया, ऐसा विश्व बैंक की PPP केस स्टडी में बताया गया है। यह एक पुराना, पूरा हो चुका प्रोजेक्ट है, इसलिए इसे केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, नई घोषणा के रूप में नहीं।

प्रोजेक्ट की संरचना

केस स्टडी के अनुसार Sahastratronic Controls Private Limited को ESCO नियुक्त किया गया। एनर्जी सर्विसेज एग्रीमेंट और बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर ढांचे के तहत कंपनी ने 486 स्ट्रीट लाइट कंट्रोलर डिज़ाइन, निर्माण, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग और रखरखाव का काम लिया, जो करीब 19,000 स्ट्रीट लाइटों को कवर करते हैं।

बचत की गारंटी

कंपनी ने इन स्थापनाओं से महानगरपालिका को पांच साल तक कम से कम 25% ऊर्जा बचत की गारंटी दी। निगम ने ऐसे पैनल मंज़ूर किए जो ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार वोल्टेज बदल सकते हैं, जबकि हर स्थिति में ज़रूरी ल्यूमेन स्तर बनाए रखते हैं।

दूसरा चरण

केस स्टडी के अनुसार दूसरे चरण के अंत, यानी नवंबर 2005 तक, 7,000 स्ट्रीट लाइटों को चलाने वाले 125 अतिरिक्त कंट्रोलर लगाए गए। अनुमानित वार्षिक बिजली खर्च से जुड़ा आंकड़ा हमारे पास मौजूद अंश में अधूरा था, इसलिए उसे यहां नहीं दिया गया है।

क्यों मायने रखता है

केस स्टडी के मुताबिक बचत के सफल नतीजों और कर्ज़दाताओं को समय पर भुगतान के कारण यह प्रोजेक्ट देश की दूसरी नगरपालिकाओं के लिए आदर्श बन गया। आज के नगर निकायों के लिए यह दिखाता है कि पूंजी खर्च के बिना भी स्ट्रीट लाइटिंग सुधारी जा सकती है।