शुरुआती खर्च की तुलना

सोलर लाइट (40W, खंभे सहित): ₹12,000–₹18,000 प्रति पॉइंट। ग्रिड LED (40W, खंभे सहित): ₹6,000–₹10,000 प्रति पॉइंट - लेकिन अगर बिजली का तार और ट्रांसफार्मर नहीं है तो प्रति पॉइंट ₹2,500–₹6,000 अलग से खर्च होगा। नई सड़क पर जहां बिजली की लाइन नहीं है - सोलर अक्सर सस्ती पड़ती है। जहां पहले से बिजली की लाइन है - ग्रिड LED सस्ती है।

बिजली कटौती में कौन काम करेगा?

ग्रिड LED: बिजली कटौती के दौरान बंद हो जाएगी - और गांवों में कटौती अक्सर रात में ही होती है, जब रोशनी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। सोलर LED: बिजली से पूरी तरह स्वतंत्र - 12 घंटे की कटौती में भी जलती रहती है। जिन इलाकों में रोज़ 4–8 घंटे कटौती होती है (ज़्यादातर ग्रामीण महाराष्ट्र, UP, बिहार), वहां सोलर बहुत बेहतर है।

10 साल में कुल खर्च

ग्रिड LED (40W, 10 घंटे/रात, ₹7/यूनिट): बिजली बिल = ₹1,022/साल = ₹10,220/10 साल। + रखरखाव ₹3,000। कुल = ₹13,220 + इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च। सोलर LED: बिजली बिल = ₹0। रखरखाव ₹5,000/10 साल (LiFePO4 बैटरी के साथ बैटरी बदलने की ज़रूरत नहीं)। नई सड़क पर सोलर अक्सर सस्ती साबित होती है - खासकर सब्सिडी के साथ।

कब कौन सी चुनें?

सोलर चुनें जब: बिजली कटौती ज़्यादा हो। बिजली की लाइन दूर हो (इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च ज़्यादा)। सरकारी सब्सिडी मिल रही हो। रखरखाव की क्षमता कम हो (केबल नेटवर्क नहीं रखना पड़ता)। ग्रिड LED चुनें जब: पहले से बिजली की लाइन मौजूद हो और भरोसेमंद हो। बहुत ऊंची लक्स (हाईवे जैसी) चाहिए। पैनल के लिए पेड़ों की भारी छाया हो।