सरकार क्यों देती है मुफ्त सोलर लाइट?
केंद्र और राज्य सरकार MNRE (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय), 14वें/15वें वित्त आयोग, और राज्य की अपनी योजनाओं के तहत ग्राम पंचायतों को सोलर स्ट्रीट लाइट के लिए पैसा देती है। क्योंकि: गांव की सड़कें रात को रोशन रहें। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा बढ़े। बिजली की बर्बादी कम हो। गांवों का विकास हो।
आवेदन कैसे करें - स्टेप बाय स्टेप
Step 1: ग्राम सभा में प्रस्ताव पास करें - सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का प्रस्ताव ग्राम सभा में पास होना जरूरी है। Step 2: ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) से संपर्क करें और योजना के बारे में पूछें। Step 3: MEDA (महाराष्ट्र) / UPNEDA (UP) / GEDA (गुजरात) के जिला कार्यालय से संपर्क करें। Step 4: रोड मैप और लाइट पॉइंट की लिस्ट सबमिट करें। Step 5: स्वीकृति मिलने पर टेंडर होगा - BIS सर्टिफाइड निर्माता से खरीद होगी। Step 6: इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग। ग्राम पंचायत को आमतौर पर 0–20% का योगदान देना होता है।
खरीद में किन बातों का ध्यान रखें
BIS सर्टिफिकेट अनिवार्य - हर लाइट पर BIS मार्क होना चाहिए। LiFePO4 बैटरी - लेड-एसिड बैटरी से बचें, 2–3 साल में खराब हो जाती है। MPPT कंट्रोलर - PWM नहीं, MPPT कंट्रोलर होना चाहिए। 2 साल की वारंटी - निर्माता की ओर से (ट्रेडर की नहीं)। ISO 9001 फैक्ट्री - यह गुणवत्ता की गारंटी है। Xera Tech, नासिक - BIS, ERDA, ISO 9001, ZED, PWD अप्रूव्ड निर्माता है।
कितनी लाइट चाहिए होगी?
500 मीटर की सड़क (20–25 मीटर की दूरी पर): 20–25 लाइटें। 1 किलोमीटर की सड़क: 40–45 लाइटें। स्कूल, अस्पताल, तालाब, पंचायत भवन पर - अलग से लाइट जरूर लगाएं। चौराहों पर और गांव के प्रवेश द्वार पर - एक-एक अतिरिक्त लाइट।
