अंधेरे में क्या होता है?

भारत के हज़ारों गांवों में: महिलाएं सुबह 4 बजे पानी भरने अंधेरे में जाती हैं। लड़कियां सर्दियों में अंधेरे में स्कूल छोड़ती हैं। घरेलू हिंसा और अपराध रात में ज़्यादा होते हैं। महिला SHG (स्वयंसहायता समूह) की बैठकें शाम को नहीं हो पातीं। कई सर्वेक्षण दिखाते हैं: जहां सड़क पर रोशनी है, वहां महिलाओं की आवाजाही रात में 40–50% बढ़ जाती है।

सोलर लाइट का बदलाव

स्कूल के रास्ते पर सोलर लाइट: लड़कियों की स्कूल उपस्थिति बढ़ती है। अभिभावक भेजने में कम डरते हैं। पानी के स्रोत पर लाइट: महिलाएं सुबह जल्दी और शाम को भी सुरक्षित पानी भर सकती हैं। स्वास्थ्य केंद्र का रास्ता: रात को प्रसव या इमरजेंसी में घर से निकलना आसान। खेत और बाज़ार का रास्ता: महिलाएं सुबह जल्दी काम पर जा सकती हैं।

CSR और सरकारी योजनाओं में महिला सुरक्षा

Companies Act की Schedule VII में: महिलाओं की सुरक्षा एक अलग eligible CSR head है। Beti Bachao Beti Padhao: लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा। Nirbhaya Fund: महिला सुरक्षा पर खर्च होता है। राज्य की Ladli Laxmi, Kanya Utthan जैसी योजनाएं। इन सभी में सड़क पर रोशनी एक fundable item है - सरपंच और NGO इसका फायदा उठाएं।