Apna Chhattisgarh की एक रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सौर ऊर्जा अब रोशनी, पेयजल और सिंचाई, तीनों में काम आ रही है। रिपोर्ट लगभग तीन सप्ताह पुरानी है। छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र का पड़ोसी राज्य है और सुकमा का अनुभव गढ़चिरौली जैसे जंगली, दुर्गम इलाकों के लिए भी प्रासंगिक है।

कितने सोलर हाईमास्ट लगे

रिपोर्ट के अनुसार केरलापेन्दा और तोकनपल्ली सहित विभिन्न गांवों और नगरीय निकाय क्षेत्रों में 71 सोलर हाईमास्ट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 8 अन्य संयंत्रों की स्थापना प्रगति पर है।

शिकायत मिली तो मरम्मत हुई

सुशासन तिहार में मिली शिकायतों पर क्रेडा (CREDA) के जिला कार्यालय ने कार्रवाई की और खराब सोलर हाईमास्ट संयंत्रों की LED लाइट और बैटरियां बदलीं। रिपोर्ट के अनुसार इससे बंद पड़ी रोशनी फिर से शुरू हुई। सोलर लाइटिंग की सबसे बड़ी चुनौती स्थापना नहीं, रखरखाव होता है, और यह उदाहरण दिखाता है कि शिकायत-आधारित मरम्मत कैसे काम कर सकती है।

रोशनी के अलावा

रिपोर्ट में सोलर पंपों से पेयजल की उपलब्धता आसान होने और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई से किसानों को मिल रही सुविधा का भी ज़िक्र है। हमने रिपोर्ट के इन हिस्सों के आंकड़े अलग से सत्यापित नहीं किए हैं।