कारण 1 - लेड-एसिड बैटरी
सबसे बड़ा कारण: सस्ती लेड-एसिड बैटरी। भारत की गर्मी में (45°C+) लेड-एसिड बैटरी की क्षमता 30–40% कम हो जाती है। 2–3 साल में बिल्कुल खराब हो जाती है। मानसून में पहले ही रात कट जाती है। समाधान: LiFePO4 बैटरी वाली लाइट ही खरीदें।
कारण 2 - PWM कंट्रोलर
सस्ती लाइट में PWM (Pulse Width Modulation) कंट्रोलर होता है। यह बादल वाले दिनों में पैनल से 25–30% कम बिजली लेता है। मानसून में बैटरी कम चार्ज होती है → लाइट जल्दी बुझ जाती है। समाधान: MPPT कंट्रोलर वाली लाइट खरीदें।
कारण 3 - नकली या अनसर्टिफाइड LED
बिना BIS सर्टिफिकेट की LED चिप जल्दी खराब होती है। चिप को ज़रूरत से ज़्यादा करंट दिया जाता है - शुरू में ज़्यादा रोशनी, 1–2 साल में खराब। समाधान: BIS IS 16905 सर्टिफाइड लाइट खरीदें। ERDA टेस्ट रिपोर्ट मांगें।
कारण 4 - खराब इंस्टॉलेशन
पैनल पर पेड़ की छाया - बैटरी कभी पूरी चार्ज नहीं होती। पैनल गलत दिशा में (दक्षिण की बजाय पूर्व या उत्तर की ओर)। ढीले कनेक्शन - बारिश में शॉर्ट सर्किट। फाउंडेशन गहरी नहीं - खंभा झुक जाता है। समाधान: अनुभवी इंस्टॉलर से लगवाएं, कमीशनिंग रिपोर्ट लें।
