Flicker के मुख्य कारण
ढीला कनेक्शन: सबसे common कारण - तार या terminal ढीला होने से बिजली का flow असमान होता है। ड्राइवर खराब होना: capacitor degrade होने पर output unstable हो जाता है - flicker शुरू होता है। वोल्टेज फ्लक्चुएशन: ग्रामीण इलाकों में अक्सर वोल्टेज 170–190V के बीच ऊपर-नीचे होता है - सस्ता ड्राइवर इसे handle नहीं कर पाता। डिमर के साथ इनकम्पेटिबल LED: कुछ पुराने डिमर LED के साथ ठीक से काम नहीं करते।
कैसे ठीक करें - स्टेप बाय स्टेप
Step 1: मेन सप्लाई बंद करें और सभी कनेक्शन टाइट करें - स्क्रू टर्मिनल पर हल्का सा खींचकर जांचें। Step 2: अगर flicker बना रहे - drivers को check करें। Driver का तापमान महसूस करें - अगर बहुत गर्म है, यह fail होने का संकेत है। Step 3: वोल्टेज मापें (multimeter से)। अगर 170V से कम या 250V से ज़्यादा है - wide-range driver (100–277V) इस्तेमाल करें। Step 4: ड्राइवर बदलें - same output current (mA) वाला नया ड्राइवर लगाएं।
Flicker-free LED क्यों ज़रूरी है?
स्कूल और दफ्तर: लंबे समय तक flicker वाली लाइट में बैठने से सिरदर्द और आंखों में थकान होती है। फैक्ट्री में रोटेटिंग मशीन (जैसे लेथ, फैन): flicker frequency मशीन की rotation speed से मैच हो जाए तो मशीन रुकी हुई दिखती है, लेकिन असल में चल रही होती है - गंभीर सुरक्षा खतरा। अच्छे ड्राइवर वाली LED (Meanwell, Inventronics) में flicker 5% से कम होता है - यह काफी सुरक्षित है।
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