Payback Period क्या है?
Payback Period = कुल निवेश ÷ सालाना बचत। उदाहरण: एक 40W ग्रिड LED लाइट जिसका सालाना बिजली बिल ₹1,022 है, उसकी जगह सोलर लाइट लगाई (₹15,000 की लागत, बिजली का बिल ₹0)। नई सड़क पर - ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर (केबल, ट्रांसफार्मर) का खर्च ₹6,250/पॉइंट अलग से जुड़ता है। सोलर: सालाना बचत = ₹1,022 (बिजली) + ₹6,250 (इंफ्रास्ट्रक्चर, एक बार) = कुल बचत बहुत जल्दी।
सब्सिडी के साथ ROI
अगर 40% सब्सिडी मिलती है: सोलर लाइट की वास्तविक कीमत ₹15,000 से ₹9,000 हो जाती है। नई सड़क पर: ₹9,000 निवेश, बचत = ₹1,022 (बिजली) + ₹6,250 (इंफ्रास्ट्रक्चर बचत) + ₹500 (रखरखाव बचत) = ₹7,772/साल। Payback = ₹9,000 ÷ ₹7,772 = लगभग 1.2 साल।
10 साल का कुल फायदा
10 साल में सोलर का खर्च: ₹15,000 (शुरुआती) + ₹5,000 (रखरखाव) = ₹20,000। 10 साल में ग्रिड का खर्च: ₹6,250 (इंफ्रास्ट्रक्चर) + ₹10,220 (बिजली) + ₹3,000 (रखरखाव) = ₹19,470। दोनों लगभग बराबर - लेकिन सब्सिडी मिलने पर सोलर साफ तौर पर सस्ती। साथ ही सोलर बिजली कटौती में भी जलती है - यह extra value है जो calculation में नहीं दिखती।
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