धुळे जिले के मौजे शिरुड गांव, तालुका व जिला धुळे की मागासवर्गीय वस्ती (पिछड़ा वर्ग बस्ती) में एक निविदा के तहत सोलर हाईमास्ट स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी। यह कार्य अनुसूचित जाति व नवबौद्ध घटकांच्या वस्तीचा विकास करणे योजना, 2024-25 के अंतर्गत वित्तपोषित है।
यह योजना किस तरह काम करती है
यह राज्य योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति और नवबौद्ध समुदाय बहुल बस्तियों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं — जैसे सड़क, गटर और स्ट्रीट लाइट — पहुंचाने के लिए बनाई गई है, ताकि ये बस्तियां सामान्य ग्राम पंचायत बजट चक्र की प्रतीक्षा किए बिना प्राथमिकता के आधार पर बुनियादी ढांचा प्राप्त कर सकें।
एक हाईमास्ट पूरी बस्ती के लिए क्यों पर्याप्त होता है
अलग-अलग सामान्य खंभों की तुलना में एक सोलर हाईमास्ट छोटी बस्ती के सामुदायिक क्षेत्र को एक ही ऊंचे बिंदु से समान रूप से रोशन कर सकता है, जिससे स्थापना की जटिलता व दीर्घकालिक रखरखाव दोनों कम हो जाते हैं — छोटे पैमाने की बस्ती-स्तरीय परियोजनाओं में यह एक आम और किफायती विकल्प माना जाता है।
धुळे जिले में जारी समान परियोजनाएं
यह निविदा धुळे जिले में इसी सीजन में शिरपूर तालुका के मौजे पळासनेर गांव में पेसा योजना के तहत हुई सोलर हाईमास्ट परियोजना और शिंदखेडा तालुका के अरवे गांव में गंगेश्वर मंदिर परिसर की परियोजना के साथ-साथ, ज़िले भर में सक्रिय बस्ती-स्तरीय सोलर लाइटिंग कार्यक्रम का हिस्सा है।


